Posts

रंग बिखर जाता है

तू सामने है

कल और आज

बैठो हमारे रूबरू

ख़ाब हो गए

सु शांत सर

मेरे अंदर तू, मेरे बाहर तू

हमारी दुनिया

तलाश जारी है

मन काग़ज़ की नाव

चाँद का इशारा

संघर्षों का दौर

शहर की रात

ख़बर आई है

सफ़र- ख़त से मेल तक

सु शांत

FOR SUSHANT

दुल्हन बनूँ मैं तेरी

तुम्हें हक़ है

जवानी भी क्या खूब होती है