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LOVE IS LOVE

मेरे बस में कुछ नहीं

उनकी दिल्लगी का क्या

तेरी खातिर

समेट कर बाहों में

एक ग़ज़ल ऐसी भी

फ़ना हो जाऊँ

शीशों पे कई बार उतारा है ,

अक्स तेरा

सैलाब नज़र आयेगा

इश्क़ मिजाज़ी हूँ ,

चूम लेते थे ,,

ज़रिया हूँ , तेरे इश्क़ को पाने का

आँखे अभी भी नम सी थी ,

लिए फिरते ही दिल अपना